रसोई के लिए वास्तु शास्त्र: सुख-समृद्धि के लिए रखें इन बातों का ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर (किचन) केवल खाना बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र स्थान है जहाँ माँ अन्नपूर्णा का वास होता है। यदि रसोई में वास्तु के नियमों का सही पालन किया जाए, तो घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसके विपरीत, वास्तु दोष होने पर परिवार के सदस्यों को आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
किचन में दिशाओं का विशेष महत्व होता है। वास्तु के अनुसार, ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिशा में भारी सामान, फ्रिज, सिंक या बड़ी अलमारियां रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे धन की हानि और नकारात्मकता बढ़ सकती है। इसके बजाय, गैस चूल्हा हमेशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा में रखना चाहिए, जो अग्नि तत्व की दिशा मानी जाती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है।
रसोई में कुछ चीजों को रखना वर्जित माना गया है जो बरकत को रोक सकती हैं। उदाहरण के लिए, किचन में कभी भी झाड़ू या पोछा नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे माँ अन्नपूर्णा नाराज हो सकती हैं। साथ ही, किचन में शीशा लगाना, कूड़ेदान (डस्टबिन) रखना या गंदे कपड़े छोड़ना भी वास्तु दोष पैदा करता है। टूटे-फूटे बर्तन या खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी तुरंत हटा देने चाहिए, क्योंकि ये सेहत को नुकसान पहुँचाते हैं और घर की उन्नति में बाधा डालते हैं।
इन छोटे-छोटे वास्तु सुधारों को अपनाकर आप अपने घर को सकारात्मकता से भर सकते हैं। सही दिशा में सही सामान रखने से न केवल घर की कलह कम होती है, बल्कि स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। नए साल में अपने किचन को वास्तु के अनुरूप व्यवस्थित करें और खुशहाल जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।